लातेहार में सड़क के अभाव में मरीज को खटिया पर लादकर पांच किलोमीटर तक पैदल चले ग्रामीण, दो बार पार करनी पड़ी नदी; मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद ऑटो से अस्पताल ले जाया गया।
न्यूज़ डेस्क
लातेहार:
गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के सरकारी दावों के बीच झारखंड के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इसकी एक दर्दनाक तस्वीर लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के सुदूरवर्ती दातुखाड़ गांव से सामने आई है। यहां सड़क नहीं होने के कारण एक बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खटिया का सहारा लेना पड़ा। मरीज को खटिया पर लादकर ग्रामीण करीब पांच किलोमीटर तक पैदल चले। इस दौरान उन्हें दो बार नदी पार करनी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया, जहां से ऑटो के जरिए उसे अस्पताल ले जाया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, दातुखाड़ गांव निवासी 30 वर्षीय सिम्पल कोरवा पिछले करीब दो महीने से बवासीर की बीमारी से परेशान थे। सोमवार को अचानक उनकी तबीयत अधिक बिगड़ गई। दर्द इतना बढ़ गया कि उनके लिए चलना और बैठना भी मुश्किल हो गया। ऐसे में परिजनों के सामने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई। गांव तक सड़क नहीं होने और किसी वाहन के नहीं पहुंच पाने के कारण ग्रामीणों ने मरीज को खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाने का फैसला किया।
इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने सामूहिक सहयोग से सिम्पल कोरवा को खटिया पर लिटाया और कंधों पर उठाकर पैदल ही मुख्य सड़क की ओर निकल पड़े। करीब पांच किलोमीटर के इस कठिन सफर में रास्ते में पड़ने वाली नदी को दो बार पार करना पड़ा। नदी के पानी से होकर गुजरते हुए ग्रामीणों ने किसी तरह मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद ऑटो की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल भेजा गया।
सड़क नहीं होने से हर बार जान जोखिम में डालने की मजबूरी
दातुखाड़ गांव की यह घटना ग्रामीण इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करती है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव तक आज तक सड़क नहीं पहुंची है। गांव में जब भी कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है, तो उसे इसी तरह खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ जाने से मरीजों को अस्पताल पहुंचाना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण सुरेंद्र कोरबा ने बताया कि गांव तक सड़क नहीं होने के कारण लोगों को हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए परेशान होना पड़ता है। विशेषकर किसी के बीमार पड़ने पर स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। मरीज को खटिया पर लादकर करीब पांच किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ता है। रास्ते में नदी भी पार करनी पड़ती है। यदि गांव तक सड़क और नदी पर पुल की सुविधा होती, तो मरीज को इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीण
दातुखाड़ गांव की यह घटना ग्रामीण विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर गांवों तक सड़क पहुंचाने की योजनाएं चलाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर आज भी ग्रामीणों को मरीजों को खटिया पर ढोकर अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। सड़क और पुल के अभाव में ग्रामीणों को न केवल रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी होती है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी उन्हें भारी जोखिम उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों की मांग है कि दातुखाड़ गांव तक जल्द से जल्द सड़क का निर्माण कराया जाए और नदी पर पुल बनाया जाए, ताकि उन्हें बीमारी और आपातकालीन परिस्थितियों में इस तरह की कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।










